मास की सोमवती अमावस्या पर तपोभूमि में आस्था का सैलाब उमड़ा। देश के कोने-कोने से आए लाखों श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी डुबकी लगाई और कामदगिरि की परिक्रमा की। भोर से मंदाकिनी स्नान का शुरू हुआ सिलसिला देर शाम तक चला। भीषण गर्मी में आस्था भारी दिखी।सोमवती अमावस्या पर चित्रकूट में भक्तों की भीड़ दिखाई दी। रामघाट पर श्रद्धालु मंदाकिनी में नहाने को आतुर दिखा। देश भर से बड़ी संख्या में आए भक्तों ने मंदाकिनी में स्नान के बाद कामदगिरि की परिक्रमा की। 43 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच भक्त भगवान कामतानाथ के जयकारे लगाते आगे बढ़ते रहे। इस दौरान भक्तों ने बाबा मत्तगजेंद्रनाथ में जलाभिषेक भी किया। हनुमानधारा, जानकीकुंड, स्फटिक शिला, सती अनुसुइया आश्रम, गुप्त गोदावरी, रामशैय्या आदि धार्मिक स्थल भी जय सियाराम और सीताराम के जयकारों के गूंजे। धर्मनगरी चारों ओर प्रभु की भक्ति में डूबी रही।
सुरक्षा को लेकर अधिकारियों की रही नजर अमावस्या मेला का जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल व पुलिस अधीक्षक अतुल शर्मा ने जायजा लिया।
रामघाट व परिक्रमा मार्ग में अधिकारियों के साथ पहुंचे। एसडीएम कर्वी पूजा यादव व सीओ सिटी शीतला प्रसाद पांडेय से कहा कि अच्छी तरह से मेला क्षेत्र की साफ सफाई कराएं। कोई भी दुकानदार अतिक्रमण न करने पाए लगातार निगरानी रखी जाए। जोनल तथा सेक्टर मजिस्ट्रेट को निर्देश दिए कि पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर मेला को संपन्न कराएं। जगदगुरु के गनर व शिष्य ने लोगों की बचाई जान
सोमवती अमावस्या के पवित्र अवसर पर पद्मविभूषण जगदगुरु स्वामी रामभद्रचार्य महाराज ने हरिद्वार में भगवती गंगा में स्नान किया। उनके उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्रदास ने बताया कि स्नान के पश्चात गंगा तट पर ही पूर्व की भांति गुरुदेव जप के लिए बैठे थे उसी समय घाट पर बहुत कोलाहल हुआ। गुरुदेव की इच्छा से हमने पूछा तो एक अधीर व्यक्ति करुण स्वर में कह रहा था की सब डूब गए और देखा तो एक ही परिवार के छह सदस्य अपने परिवार के एक बालक को बचाने के लिए गंगा जी में कूद गए थे। जिसमें लगभग 80 वर्ष के वृद्ध से लेकर 22 वर्ष का युवक और कुछ माताएं भी थी। घाट पर उपस्थित कोई भी व्यक्ति इतना कुशल तैराक नहीं था कि उन्हें बचाकर ला सकें। भगवान की प्रेरणा से और गुरुदेव के आशीर्वाद से गुरुजी की सुरक्षा में रहने वाले उत्तर प्रदेश पुलिस के साहसी योद्धा सचिन दुबे और विद्यार्थी आचार्य हिमांशू ने अपने प्राणों की चिंता किए। सभी को बचाया। गुरुदेव और इन दोनों युवाओं को 1500-1500 रुपये का पुरस्कार दिया।
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